(डॉ.) कविता वाचक्नवी
London,
UK
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- Title: ति-रंगा
- Description: तिरंगे के तीन रंगों में निहित अर्थ की व्याप्ति का जो प्रचलित रूप है, उसकी अर्थवत्ता में उदात्त एवम् तेजस् व मन्यु को अभिलक्षित करने के उद्देश्य से यह कविता रची गई । केसरिया तो बलिदान भाव का प्रतीक माना ही जाता है; क्रमश: श्वेत व हरे के साथ युद्धक भूमिका (सुदर्शन चक्र वाली) का नियोजन नहीं किया जाता. चक्र के निहितार्थ को व्यक्त करने के उद्देश्य से उन्हीं प्रतीकों को नए अर्थबोध से भर, राष्ट्रीय अस्मिता के प्रमुख प्रतीक ध्वज को आधार बना, जागरण व प्ररेणा के स्रोतरूप में दर्शाने का यत्न है .
- Poem:
"तिरंगा"
- (डॉ.) कविता वाचक्नवी
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संधि की
पावन धवल रेखा
हमारी शांति का
उद्घोष करती
पर नहीं क्या ज्ञात तुमको
चक्र भी तो
पूर्वजों से
थातियों में ही मिला है,
शीश पर अंगार धरकर
आँख में ले स्वप्न
धरती की फसल के
हाथ में
हलधर सम्हाले
चक्र
हरियाली धरा की खोजते हैं,
और है यह चक्र भी
वह
ले जिसे अभिमन्यु
जूझा था समर में,
है यही वह चक्र
जिसने
क्रूरता के रूप कुत्सित
कंस या शिशुपाल की
ग्रीवा गिराई।
हम सदा से
इन ति- रंगों में
सजाए चक्र
हो निर्वैर
लड़ते हैं अहिंसक,
और सारे शोक, पीड़ा को हराते
लौह-स्तंभों पर
समर के
गीत लिखते,
जय-विजय के
लेख खोदें,
हम
अ-शोकों के
पुरोधा हैं।
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